हिंदी व्याकरण किसे कहते है | हिंदी व्याकरण क्या है? व्याकरण के कितने भाग है?

हिंदी व्याकरण क्या है ? हिंदी व्याकरण की परिभाषा –

Grammar या व्याकरण से सभी थोडा बहुत तो परिचित है क्युकी हम स्कूल जाते  समय ग्रामर या व्याकरण की बात तो पड़ी है| चलिए इस लेख मे विस्तार से जानेंगे की हिंदी व्याकरण क्या है और  हिंदी व्याकरण मे कितने भेद है? हिंदी व्याकरण एक ग्रन्थ या पुस्तक है, जिसके द्वारा हम हिंदी भाषा को शुद्ध रूप से बोलने, पड़ने और लिखने के लिए नियमावली का ज्ञान सिख सकते है | किसी भी भाषा की शुद्धता से बोलने, पड़ने और लिखने का नियमावली का अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण का विवरण लिखा रहता है उसे व्याकरण या अंग्रेजी मे ग्रामर कहलाता है|

आप का खोज भी अगर इसी हिंदी व्याकरण क्या है? हिंदी व्याकरण मे कितने भेद है, की बारे मे है तो आप सही लेख पर पहुचे है| इस लेख को अंत तक पड़ने पर आपको हिंदी व्याकरण के बारे पूरी जानकारी मिल जाएगा|

 

हिंदी व्याकरण किसे कहते है? हिंदी व्याकरण की परिभाषा –

 

 

पहले हमें जानना है की व्याकरण क्या है?

व्याकरण  (Grammer) एक ग्रन्थ या शास्त्र है, जो किसी भाषा की शुद्धता से बोलने, पड़ने और लिखने का नियमावली का अंग-प्रत्यंग का विशलेषण का विवरण लिखा रहता है, उसे हम व्याकरण कहलाते है, किसी भाषा को सही से जानने के लिए व्याकरण की जरुरत पड़ते है अर्थात किसी भाषा की पूर्ण जानकारी उसी भाषा की व्याकरण या ग्रामर से हमें पता चलता है |

 

हिंदी व्याकरण किसे कहते है ?

हिंदी भाषा को भी शुद्धता के साथ बोलने, पड़ने और लिखने के लिए लियामवाली का विवरण की शास्त्र को हिंदी व्याकरण कहते है| किसी भी भाषा की शुद्धता और सुन्दरता को बनाए रखने के लिए इन नियमावली का पालन करना आवश्यक होता है अर्थात व्याकरण के बिना भाषा अधुरा होता है| जिस भाषा की व्याकरण नहीं होता उस भाषा पूर्णता और शुद्धता नहीं होता| हमें हिंदी भाषा की पूर्ण जानकारी के या हिंदी भाषा की नियमावली को जानने के हिंदी व्याकरण पड़ना जरुरी होता है, नहीं तो अधुरा ज्ञान होता है आप सही और शुद्धता के साथ बोल नहीं पाते, लिख नहीं पाते और पड़ नहीं पाते|

 

भाषा क्या है?

भाषा अपनी मन की भाव को या मन की विचार को एक दुसरो के साथ आदान-प्रदान करने का एक माध्यम है| भाषा कथित या मौखिक और लिखित इन दो प्रकार के होते है| जिस भाषा की लिपि नहीं है केवल बोली जाती है उसे कथित या मौखिक भाषा कहते है और जिस भाषा की बोलने के साथ-साथ लिपि अर्थात चिन्ह भी होते है उसे लिखित भाषा कहते है| दुनिया मे कई सारे भाषाए है, उसमे से ज्यादातर कथित भाषा है| हमारे भारत मे भी अनेक भाषाए बोली जाती है उनमे से 22 भाषाए भारत की संबिधान द्वारा सिकृति प्राप्त भाषाए है जैसे की हिंदी, बंगाली, असमिया, बोडो, दुगरी, गुजराती, तामिल, तेलेगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उर्दू, संस्कृति, सिंधी, संताली, पंजाबी, ओडिया, नेपाली, मणिपुरी, मैथिलि, कश्मीरी और कंकणी | इसमें से हिंदी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा है|

 

हिंदी व्याकरण के कितने भाग या अंग है?

हमें पता चला है की व्याकरण बोले तो किसी भाषा की नियमावली और अंग-प्रतंग की विशलेषण की ग्रन्थ है | हिंदी व्याकरण को भी कई अंग या भागो मे बाटा गया है, मुख्य रूप से हिंदी व्याकरण को चार भागो मे बाटा गया है, चलिए जानते है हिंदी व्याकरण की भाग क्या क्या है –

  1. वर्ण या अक्षर
  2. शब्द
  3. पद
  4. वाक्य

 

1 ) वर्ण या अक्षर किसे कहते है?

किसी भाषा की सबसे छोटी इकाई को ध्वनी  कहते है और उसी ध्वनि की लिखित रूप या चिन्ह  को वर्ण कहते है | जैसे की – अ, आ,क, ख, ग आदि

वर्ण को दो भागो मे भाग किया है – स्वर वर्ण और व्यंजन वर्ण

a) स्वर वर्ण : जिन वर्ण को उच्चारण करने मे किसी दुसरो वर्ण की सहायता नहीं लेने पड़ते, उसे स्वर वर्ण कहते है| जैसे की

अ आ इ ई

उ ऊ ऋ

ए ऐ  ओ औ

मुठ 11 स्वर वर्ण है|

b) व्यंजन वर्ण : जिन वर्ण को उच्चारण करने मे किसी दुसरो वर्ण की सहायता लेने पड़ते है उसे व्यंजन वर्ण कहते है | जैसे की –

क ख ग घ ङ

च छ ज झ ण

ट ठ  ड ध न

त थ द ध न

प फ ब भ म

य र ल व

श ष स ह

क्ष त्र ज्ञ

 

2) शब्द किसे कहते है?

शब्द विचार हिंदी व्याकरण का दूसरा भाग है | एक से अधिक वर्ण या अक्षर के समूह को शब्द कहते है, जैसे की – आप, रमेश, राजा आदि |

शब्द को दो भागो  में भाग किया गया है, जैसे की सार्थक शब्द और निरर्थक शब्द

सार्थक शब्द : जिन शब्द का कोई अर्थ निकलता है उसे सार्थक शब्द कहते है| जैसे की – रजा, खाना, किताब  आदि

निरर्थक शब्द: जिन शब्द का कोई अर्थ नहीं निकलते है उसे निरर्थक शब्द कहते है| जैसे की -पानी-सानी

 

3) पद किसे कहते है?

पद हिंदी व्याकरण का एक महत्तपूर्ण भाग है अर्थात शब्द का ही दूसरी अंग है पद| जब शब्द वाक्य मे परिणत होता है तो वह व्याकरण के नियमो में बांध जाता है और उसे शब्द न कहकर पद कहा जाता है| इसी पद को पाच भागो मे भाग किया गया है| जैसे की-

a) संज्ञा

b) सर्वनाम

c)  विशेषण

d) क्रिया

e) अव्यय

a) संज्ञा : किसी व्यक्ति, जाति, जगह, प्राणी, गुण, द्रव्य, भाव, धर्म आदि नाम वाचक शब्द को संज्ञा कहते है| जैसे की – राम, मुंबई, ब्राह्मण, हाथी आदि|

संज्ञा को तिन प्रकार मे भाग किया है|

संज्ञा के प्रकार

a) व्यक्तिवाचक संज्ञा

b) जातीवाचक संज्ञा

c) भाववाचक संज्ञा

व्यक्तिवाचक संज्ञा: जिस संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, प्राणी, वास्तु अथबा स्थान आदि की नाम का बोध करता है उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है| जैसे की नरेन्द्र मोदी, हिमालय,

जातीवाचक संज्ञा: जिस शब्द से किसी प्राणी या वास्तु की समस्त जाती का बोध करता है उन शब्द को जातिवाचक संज्ञा कहते है| जैसे – मछली, हाथी, मनुष्य, फुल आदि|

भाववाचक संज्ञा: जिस संज्ञा शब्दों से किसी पदार्थ की अवस्था, गुण-दोष, भाव, धर्म आदि की बोध करता है उसे भाववाचक संज्ञा कहते है| जैसे की – बचपन, मोटापा, खट्टा-मिट्ठा आदि

 

अग्रेजी व्याकरण के प्रभाव से और दो संज्ञा द्रव्यवाचक और समुदाय वाचक संज्ञा को भी अंतर्भुक्त किया गया है|

द्रव्यवाचक संज्ञा : जिस संज्ञा शब्द से किसी धातु, द्रव्य आदि पदार्थ की बोध करता है उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है| जैसे की -तेल, घी, सोना, चांदी, चावल , लोहा आदि

समुदाय वाचक संज्ञा : जिस संज्ञा शब्द से किसी व्यक्तियों, वस्तुओ आदि की समूह का बोध करता है उसे समुदाय वाचक संज्ञा कहते है| जैसे की – सभा , सेना , कक्षा आदि |

 

b) सर्वनाम किसे कहते है?

जिन शब्दों का प्रयोग किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के नाम या संज्ञा  के स्थान पर व्यवहार किया जाता है उसे सर्वनाम कहते है अर्थात किसी नाम के बदले मे तुम, तुम्हारा, आप, आपका, यहाँ, वहा, हम, हमारा आदि उपयोग होते है|

सर्वनाम को छ भागो भाग किया गया है| जैसे की –

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम – में, तुम, हम, हमें आदि
  2. निजवाचक सर्वनाम – आप
  3. निश्रयवाचक सर्वनाम – यह, वह
  4. अनिश्रयवाचक  सर्वनाम – कोई, कुछ
  5. संबंधवाचक सर्वनाम – जो, सो
  6. प्रश्नवाचक सर्वनाम – कौन, क्या

 

पुरुषवाचक सर्वनाम: जिन सर्वनाम शब्दों से किसी व्यक्ति का बोध करता है उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है| जैसे की – में, तुम, आप आदि|

पुरुषवाचक सर्वनाम तिन भागो मे भाग किया गया है

  • उत्तम पुरुषवाचक (First Person)

जिन सर्वनाम का प्रयोग बात कहने वाला  या बोलने वाला अपने लिए  व्यवहार करते है, उन्हें उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है| उदहारण -में, मुझे, मेरा , हमारा, हमको, हम आदि

  • मध्यम पुरुषवाचक  (Second Person)

जिस सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बात सुनने वाले के लिए किया जाते है, उन्हें मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है| उदहारण -तू, तुम तुझे, तेरा, तुम्हे, तुम्हारा, आपने, आपका, आप  आदि |

  • अन्य पुरुषवाचक (Third Person)

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाला अन्य किसी व्यक्ति के लिए करता है, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है| उदहारण – वे, उन्हें, उसने, इसने, उन्होंने, इनका, वह, उनका आदि |

 

निजवाचक सर्वनाम: जिस सर्वनाम तीनो पुरुषो (उत्तम, मध्यम और अन्य) मे निजत्व का बोध करता है, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते है| उदहारण – में खुद पड़ लूँगा| वह खुद गाड़ी चला सकता है| उसने अपने आप लिख सकता है|

निश्रयवाचक सर्वनाम: जिस सर्वनाम द्वारा किसी निकट या दुरी की निश्चित व्यक्ति या  वास्तु की ओर संकेत या इशारा करते है, उसे निश्रयवाचक सर्वनाम कहते है| उदाहरण – यह लड़का है| वह पुस्तक है

अनिश्रयवाचक  सर्वनाम : जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी अनिच्छित व्यक्ति या पदार्थ के लिए प्रयोग होता है, उसे अनिश्रयवाचक  सर्वनाम कहते है| उदाहरण – घर के अन्दर कोई है? दाल मे कुछ काला है|

संबंधवाचक सर्वनाम: जिन सर्वनाम शब्द के द्वारा किसी दूसरी सर्वनाम के साथ संबंद्ध का बोध करता है उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते है| उदाहरण- जैसी करनी वैसी भरनी, जिसका लाठी उसकी भैस |

प्रश्नवाचक सर्वनाम: जिन सर्वनाम शब्दों को किसी प्रश्न या सवाल पूछने को प्रयोग किया जाता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है| उदाहरण – तुम्हारा नाम क्या है? अन्दर मे कौन है ?

 

c) विशेषण क्या है? 

जिन शब्दों द्वारा किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता यानि गुण, दोष, संख्या, परिणाम आदि को बोध कराता है उसे विशेषण कहते है | उदाहरण – अच्छा, बुरा, कला, गोरा, उचा, लम्बा, एक , दो आदि| जैसे – राम अच्छा लड़का है, राम ने तिन आम खाया है|

विशेषण को पाच भागो मे भाग किया गया है|

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. परिणामवाचक विशेषण
  3. संख्यावाचक विशेषण
  4. सार्वनामिक विशेषण
  5. व्यक्तिवाचक विशेषण

गुणवाचक विशेषण :जिस विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम का गुण, रूप, रंग  का बोध कराता है उसे गुणवाचक विशेषण कहते है | उदाहरण – आशा अच्छी लड़की है | यहाँ अच्छी गुण को बोध किया है|

परिणामवाचक विशेषण : जिन विशेषण शब्दों से किसी संज्ञा या सर्वनाम का परिणाम का बोध करता है उसे परिणामवाचक विशेषण कहते है| जैसे की – थोडा नमक देना| दूध बहुत कम दिया|

संख्यावाचक विशेषण : जिन विशेषण शब्दों से किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध करता है उसे संख्यावाचक विशेषण कहते है | जैसे की – एक ग्लास पानी देना, वहा तिन लड़के खड़े है |

सार्वनामिक विशेषण : जिन सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्दों से पहले लगकर उस सं विशेषण की तरह विशेषता बोध करता है उसे सार्वनामिक विशेषण कहते है| उदहारण – मेरा पुस्तक किधर है| वह लड़की कहा जा रही है|

व्यक्तिवाचक विशेषण : जिस विशेषण शब्दों की रचना किसी व्यक्तिवाचक संज्ञा से होती है तो उसे व्यक्तिवाचक विशेषण कहलाते है| जैसे की – वह पंजाबी लड़का है| मुझे भारतीय खाना पसंद है |

 

d ) क्रिया किसे कहते है?

जिन शब्दों द्वारा किसी कार्य को करना अथवा होना वोध करता है उसे क्रिया कहते है| उदहारण- मैंने आम खाया हु| सीता गाना गा रही है|

क्रिया के भेद या प्रकार क्या क्या है

क्रिया के दो भेद या प्रकाढ़ाए

अकर्मक क्रिया

सकर्मक क्रिया

अकर्मक क्रिया :जिन वाक्य मे किर्या का फल कर्ता पर ही पड़ता है अथवा कर्म की आभाव होता है, उसे अकर्मक क्रिया कहलाते है है| जैसे e की – अश्मित दौड़ता है, रानी नाचती है|

सकर्मक क्रिया : जिन वाक्य मे क्रिया के साथ कर्म का होना जरुरी होता है और इन क्रिया का असर कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते है | जैसे की – राकेश गाड़ी चलता है, रानी गाना गाती है|

 

e) अव्यय किसे कहते है?

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक, पुरुष, काल आदि के कारण कोई विकार उत्पन्न या परिवर्तन नहीं होता, उसे अव्यय या अविकार कहते है | अव्यय शब्द का मूल रूप मे कोई रूपांतर नहीं होता, इसीलिए अव्यय का अर्थ है “जो व्यय ना हो” | उदाहरण – इधर, उधर, अब, जब, कव, क्यों, किन्तु, परन्तु, धीरे-धीरे, आना, जाना  आदि शव्द |

अव्यय  के पाच प्रकार या भेद  है |

  1. क्रिया विशेषण
  2. संबंधबोधक
  3. समुच्चयबोधक
  4. विस्मयादिबोधक
  5. निपात अव्यय

 

  • क्रिया विशेषण: जिन अव्यय शब्द से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उसे क्रिया विशेषण कहते है | जैसे की – बंध, धीरे-धीरे, तेज, जल्दी, सुन्दर, कला आदि

क्रिया विशेषण की चार भेद है

  1. कालवाचक क्रिया विशेषण अव्यय
  2. स्थानवाचक क्रिया विशेषण अव्यय
  3. परिमाणवाचक क्रिया विशेषण अव्यय
  4. रीतिवाचक क्रिया विशेषण अव्यय

कालवाचक क्रिया विशेषण अव्यय :  जिन अव्यय शब्दों से क्रिया की काल या समय का  बोध कराता है उसे कालवाचक क्रिया विशेषण अव्यय कहलाते है | जैसे की – आज, काल, रात, दिन, सुवह, रातभर, दिनभर आदि शब्द |

स्थानवाचक क्रिया विशेषण अव्यय : जिन अव्यय शब्दों से क्रिया की स्थान का  बोध कराता है उसे स्वाथावाचक क्रिया विशेषण अव्यय कहलाते है | जैसे की – यहाँ,वहा, इधर, उधर, भीतर, बाहर, अन्दर आदि शब्द |

परिमाणवाचक क्रिया विशेषण अव्यय : जिन अव्यय शब्दों से क्रिया या कार्य की परिमाण का  बोध कराता है उसे स्वाथावाचक क्रिया विशेषण अव्यय कहलाते है| जैसे की- कम, ज्यादा, थोडा, अधिक आदि

रीतिवाचक क्रिया विशेषण अव्यय : जिन शब्दों से क्रिया की रीति या ढंग का बोध कराता है, उसे रीतिवाचक क्रिया विशेषण अव्यय कहते है| जैसे की – तेज, मधुर, धीरे, ध्यानपूर्वक, शांतिपूर्वक |

संबंधबोधक अव्यय: जिन अव्यय शव्दों से किसी संज्ञा या सर्वनाम के साथ  आकर उनका संबंध वाक्य के अन्य शब्द के साथ बताते है उसे संबंधबोधक अव्यय है | जैसे की – ऊपर, निचे, बाहर, पीछे, आगे, बिना

उदहारण – पैसे के बिना जीवन कुछ नहीं|

समुच्चयबोधक अव्यय: जिन अव्यय  शब्दों द्वारा दो शब्दों या वाकया को जोड़ता है उसे समुच्चयबोधक अव्यय कहते है | जैसे की – और, तथा, अथवा, अर्थात, या, परन्तु, किन्तु |

समुच्चयबोधक अव्यय को दो भागो मे भाग किया है – समानाधिकरण और व्याधिकरण

विस्मयादिबोधकअव्यय: जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, विषाद, घृणा, क्रोध, आशीर्वाद , अश्रर्य, उल्लाष आदि भावों को प्रकट करता है उसे विस्मयादिबोधक अव्यय कहते है| जैसे की – हाय भगवान ! वाह, हाय-हाय, शाबाश, खूब, हा-हा, अहा! आदि शब्द |

निपात अव्यय: जिन अव्यय शब्दों द्वारा किसी शब्द या पद के पीछे लगकर वाक्य मे उसके अर्थ मे विशेष बल लाते है उसे निपात अव्ययकहते है | जैसे की – की, ही, भी, तक, केवल, भर, जी |

 

4) वाक्य किसे कहते है? 

एक से अधिक शब्दों या पदों की सार्थक समूह को वाक्य कहलाते है , अर्थात दो या दो से अधिक शब्द या पद मिलकर अर्थपूर्ण वाक्य मे परिणत होता है |

जैसे की मेरा देश भारत है | मेरा देश महान है |

 

वाक्य की भेद या प्रकार

रचना के आधार पर तिन प्रकार के भेट है

  1. सरल वाक्य – जिन वाक्य मे एक ही विधेय या क्रिया होते है उसे सरल या साधारण वाक्य कहते है – जैसे की – अश्मित पड़ता है|
  2. संयुक्त वाक्य– जिन वाक्य मे दो या दो से अधिक सरल वाक्य रहते है और समुच्चबोधक अव्यय (और, पर, परन्तु किन्तु , की ) उसे संयुक्त वाक्य कहते है | जैसे की – सीता पदाई मे अच्छी थी पर परीक्षा मे फ़ैल हुई|
  3. मिश्रित वाक्य– जिन वाक्य मे एक प्रधान या मुख्य वाक्य हो और अन्य आश्रित उपवाक्य हो, उसे मिश्रित वाक्य कहते है| जैसे की – मुझे मालूम था की तुम उस काम को कर नहीं पवोंगे |

 

अर्थ के आधार पर वाक्य को आठ भागो मे भाग किया है –

1) विधानवाचक वाक्य– जिन वाक्यों द्वारा किसी प्रकार की जानकारी प्राप्त होते है तो उसे विधानवाचक वाक्य कहते है | जैसे की – भारत के राजधानी दिल्ली है|

 

2) इछावाचक वाक्य– जिन वाक्यों द्वारा किसी की इच्छा, आकांक्षा, आशिर्वाद आदि का बोध कराता है तो उसे इछावाचक वाक्य कहते है| जैसे की – भगवान तुम्हे आशिर्वाद दे |

 

3) आज्ञावाचक वाक्य– जिन वाक्य द्वारा किसी प्रकार की आज्ञा या प्रार्थना प्रकट किया जाता है उसे आज्ञावाचक वाक्य कहते है | जैसे की – बाहर बैठिए,  इधर बैठो

 

4) निषेधवाचक वाक्य– जिन वाक्य द्वारा किसी कार्य न होने का बोध करता है उसे निषेधवाचक वाक्य  कहलाते है | जैसे की – मैंने खाना नहीं खाया

 

5) प्रश्नवाचक वाक्य – जिन वाक्य द्वारा किसीको प्रश्न किया जाता हो उसे प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते है | जैसे की – भारत के प्रधान मंत्री कौन है ?

 

6) विस्मयबोधक वाक्य – जिन वाक्य द्वारा किसी भी प्रकार की अपनी गहरी अनुभूति या भाव प्रकट करते है उसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते है | जैसे की – है भगवान ए क्या हुवा!

 

7) संकेतवाचक वाक्य– जिन वाक्य द्वारा किसी संकेत की बोध होता है उसे संकेतवाचक वाक्य कहते है | जैसे की – मधु वो गाव मे रहता है |

 

8) संदेहवाचक वाक्य– जिन वाक्य द्वारा किसी संदेह का बोध हो उसे संदेहवाचक वाक्य कहते है| जैसे की – उसने काम सही से किया है क्या|

हिब्दी व्याकरण के बारे मे हमने क्या क्या सिखा (Q&A)

1) हिंदी व्याकरण किसे कहते है (हिंदी व्याकरण क्या है)?

उत्तर : हिंदी व्याकरण एक ग्रन्थ या पुस्तक है, जिसके द्वारा हम हिंदी भाषा को शुद्ध रूप से बोलने, पड़ने और लिखने के लिए नियमावली का ज्ञान सिख सकते है | किसी भी भाषा को शुद्धता से बोलने, पड़ने और लिखने का नियमावली का अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण का विवरण लिखा रहता है उसे व्याकरण या अंग्रेजी मे ग्रामर कहलाता है|

2) व्याकरण किसे कहते है? 

उत्तर : किसी भी भाषा को शुद्धता से बोलने, पड़ने और लिखने का नियमावली का अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण का विवरण लिखा रहता है उसे व्याकरण या अंग्रेजी मे ग्रामर कहलाता है|

3) हिंदी व्याकरण के कितने भाग या अंग है?

उत्तर : हिंदी व्याकरण के चार भाग या अंग है |

4: हिंदी व्याकरण के भेद क्या क्या है ?

उत्तर : हिंदी व्याकरण के भेद –

क) वर्ण या अक्षर

ख) शब्द

ग) पद

घ) वाक्य

5) वर्ण या अक्षर किसे कहते है?

उत्तर : किसी भाषा की सबसे छोटी इकाई को ध्वनी  कहते है और उसी ध्वनि की लिखित रूप या चिन्ह  को वर्ण कहते है | जैसे की – अ, आ,क, ख, ग आदि

6)वर्ण या अक्षर के कितने भाग है? 

वर्ण को दो भागो मे भाग किया है – स्वर वर्ण और व्यंजन वर्ण

7) शब्द किसे कहते है?

उत्तर : एक से अधिक वर्ण या अक्षर के समूह को शब्द कहते है, जैसे की – आप, रमेश, राजा आदि |

8) शब्द कितने प्रकार के होते है?

उत्तर : शब्द दो प्रकार के होते है – सार्थक शब्द और निरर्थक शब्द

9) पद किसे कहते है?

उत्तर : जब  एक से अधिक शब्द मिलकर वाक्य मे परिणत होता है तो वह व्याकरण के नियमो में बांध जाता है और तब उसे शब्द न कहकर पद कहा जाता है|

10) पद कितने प्रकार के होते है?

उत्तर : पद पाच प्रकार के होते है ?

11) पद के प्रकार क्या क्या है ?

उत्तर : पद के प्रकार -संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय |

12) वाक्य किसे कहते है? 

उत्तर : एक से अधिक शब्दों या पदों की सार्थक समूह को वाक्य कहलाते है, अर्थात दो या दो से अधिक शब्द या पद मिलकर अर्थपूर्ण वाक्य मे परिणत होता है |

जैसे की – मेरा देश भारत है | मेरा देश महान है |

13: वाक्य के कितने भेद प्रकार है ?

उत्तर : वाक्य के तिन भेद है -सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य और मिश्रित वाक्य |

 

Conclusion

आशा करता हु की हमारी इस लेख “हिंदी व्याकरण किसे कहते है और हिंदी व्याकरण के अंग कितने अंग  है का बारे में मेरी लेख द्वारा जो जानकारी आप तक पहुचाया हु सायद आपको पसंद आया होगा| अगर इस में कोई भूल त्रुटी या संदेह और सुझाऊ है तो आप निचे कमेन्ट बॉक्स मे लिख सकते है |

Dhan Lama

मे धन लामा आप सभी को Hindiwebjagat.com पर स्वागत करता हु| इस वेबसईट मे Web Technology, Blogging, Educational, GK Trends News आदि के सठिक और सरल लेख उपलब्ध करता.

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